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मगही साहित्य में हिसुआ का योगदान महत्वपूर्ण

  मगही साहित्य में हिसुआ का योगदान महत्वपूर्ण * हिसुआ में आयोजित हुई साहित्यिक गोष्ठी व कवि सम्मेलन * मगही मनभावन, सारथी और मगही संवाद पत्रिका की हुई समीक्षा हिसुआः मगही साहित्य को समृद्ध करने में हिसुआ का महत्वपूर्ण योगदान है. यहां के दिवंगत साहित्यकारों ने भी पांच दशक पहले मगही भाषा को समृद्ध किया है. अभी के साहित्यकार भी इसमें अपना योगदान दे रहे हैं. यह बातें मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय के मगही विभागाध्यक्ष डॉ. भरत सिंह ने शहर के आर्य समाज मंदिर में कही. मौका था हिन्दी-मगही साहित्यिक मंच शब्द साधक द्वारा आयोजित साहित्यिक गोष्ठी व कवि सम्मेलन का . मुख्य अतिथि ने हिसुआ के इंटरनेट मगही पत्रिका मगही मनभावन के मगही कोकिल जयराम सिंह अंक की सराहना की और कहा कि इसके संपादन के साथ-साथ रचना का चयन काफी स्तरीय है. उन्होंने सारथी पत्रिका की समीक्षा की. अन्य वक्ताओं ने मगही मनभावन और सारथी पत्रिका पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम की अध्यक्षता मगही-हिन्दी के वरिष्ठ कवि दीनबंधु ने किया, जबकि मंच संचालन कवि उदय के द्वारा हुआ. दूसरे सत्र में बसंत और समसामयिक विषयों पर कवियों ने हिन्दी...