बुझ गयी जमींदारी की आग
बुझ गयी जमींदारी की आग कवि वैद्यमुनि का गोप के निधन से समूचा क्षेत्र मर्माहत वारिसलीगंज (नवादा) :‘‘अगिया लगइवो जमींदरिया में,काली कुतिया घुसइबो कचहरिया में, लोदीपुर कचहरिया के जुल्मी जमींदरवा, से रोज ले हकय बेगरिया हो, आबो भैया जुटो भइया, अजिया लगैबय जमींदरिया के हो‘‘जमींदारों के जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करनेवाले किसान आंदोलन के पुरोधा स्वामी सहजानंद सरस्वती को अपना आदर्श मान कर जिंदगी भर मगही लोक भाषा को समृद्ध बनाने वाले कवि वैद्यमुनि का गोप के निधन से समूचा क्षेत्र मर्माहत है. किसान आंदोलन के दिनों में वे गीत मंडली के साथ लोदीपुर, मोसमा, कोनंदपुर व थालपोस आदि गांवों के किसानों के बीच मगही गीत गा कर उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना भरने का काम करते थे. शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन,चरित्र तथा संगीत का जो पाठ पढ़ाया, उसे लोग आज भी श्रद्धापूर्वक याद करते हैं. उनकी रचना हरि संकीर्तन, ज्ञात गीत माला तथा फुलंगी के खोता प्रकाशित है. फुलंगी के खोता को मगध विश्व विद्यालय की पाठय पुस्तक में भी स्थान मिला है. 1959 में कौआकोल प्रखंड के सेखोदेवरा आश्रम मे...